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परिसीमन पर टकराव: केंद्र का संतुलन का दावा, विपक्ष की संघीय ढांचे पर चिंता
देश के पांच राज्यों में चल रहे चुनाव के बीच केंद्र सरकार ने लोकसभा और राज्यसभा में दो नए विधेयक पेश करने की पहल की है, विपक्ष के भारी विरोध के बीच सरकार ने तय कर लिया है कि इन दोनों विधेयकों को लोकसभा और राज्यसभा में पास कराकर कानून का रूप दिया जाएगा।
पहले विधेयक सबसे ज्यादा विरोध दक्षिण भारत की कई पार्टियों कर रही है हालांकि केंद्र सरकार ने यह कहा है कि प्रस्तावित परिसीमन डीलिमिटेशन से दक्षिण भारत के राज्यों को कोई नुकसान नहीं होगा। तमिलनाडु में चल रहे चुनाव के बीच की विपक्ष इसका भारी विरोध कर रहा है उनका कहना है कि अगर परिसीमन यानी इमिटेशन जनसंख्या आधारित रहा तो उत्तर भारत की जनसंख्या अधिक होने के कारण दक्षिण भारत में सीटों की संख्या कम हो सकती है, जबकि केंद्र सरकार का कहना है कि परिसीमन का उद्देश्य लोकतांत्रिक प्रतिनिधित्व को और मजबूत बनाना है ना कि किसी प्रदेश या किसी क्षेत्र से अन्याय करना।
केंद्र सरकार के अनुसार लोकसभा सीटों की कुल संख्या बढ़ाई जा सकती है, लेकिन सभी राज्यों के बीच संतुलन बनाए रखने की कोशिश की जाएगी ताकि दक्षिणी राज्यों को जनसंख्या नियंत्रण की सफलता के कारण “दंडित” न होना पड़े।
यहां बताते चलें कि परिसीमन दरअसल एक संवैधानिक प्रक्रिया है, जिसके तहत देश जनगणना के आधार पर लोकसभा और विधानसभा क्षेत्रों की सीमाएं और सीटों की संख्या तय की जाती है। वर्तमान सीटों का निर्धारण 1971 की जनगणना के आधार पर किया गया था और बाद में इसे 2026 तक के लिए स्थगित (फ्रीज) कर दिया गया था। अब 2026 के बाद नई प्रक्रिया शुरू होने की संभावना है, जिससे राजनीतिक संतुलन में बदलाव आ सकता है।
हालांकि, इस मुद्दे पर विवाद भी बढ़ रहा है। कई विपक्षी नेताओं का मानना है कि यदि परिसीमन पूरी तरह जनसंख्या के आधार पर किया गया तो उत्तर भारत के राज्यों की सीटें बढ़ेंगी, जबकि दक्षिणी राज्यों की हिस्सेदारी कम हो सकती है। पूर्व केंद्रीय मंत्री पी. चिदंबरम ने कहा है कि इससे दक्षिण भारत का प्रतिनिधित्व घट सकता है और राजनीतिक संतुलन प्रभावित होगा।
इसी तरह कुछ अन्य नेताओं ने भी चिंता जताई है कि यह प्रक्रिया संघीय ढांचे (फेडरल स्ट्रक्चर) को कमजोर कर सकती है और दक्षिणी राज्यों की आवाज संसद में कम हो सकती है। वहीं विपक्षी गठबंधन ने संकेत दिया है कि वह इस मुद्दे को संसद में जोर-शोर से उठाएगा और सरकार से स्पष्ट जवाब मांगेगा।
इन तमाम आशंकाओं के बीच केंद्र सरकार ने भरोसा दिलाया है कि किसी भी राज्य की सीटें घटाई नहीं जाएंगी और सभी राज्यों को निष्पक्ष हिस्सा मिलेगा। सरकार का कहना है कि संसद में विस्तृत चर्चा के बाद ही अंतिम निर्णय लिया जाएगा, जिससे सभी पक्षों की चिंताओं को दूर किया जा सके।
कुल मिलाकर, परिसीमन को लेकर देश में राजनीतिक बहस तेज है, लेकिन केंद्र सरकार इसे संतुलित और न्यायसंगत तरीके से लागू करने का दावा कर रही है।